कानपुर एलएलआर (हैलट) अस्पताल से फरार डकैत वीरेंद्र लोधी को पेट में दर्द के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। फतेहगढ़ सेंट्रल जेल प्रशासन ने बताया, वीरेंद्र खून की कमी की समस्या से जूझ रहा था 27 मार्च को फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया था, वहां से 31 मार्च को कानपुर भेजा गया था
2016 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी
एसीपी स्वरूपनगर व्रज नारायण सिंह ने बताया, वीरेंद्र के खिलाफ वर्ष 2012 में डकैती और हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। इटावा की दस्यु उन्मूलन कोर्ट ने 23 सितंबर, 2016 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसको तीन नवंबर, 2019 को जिला जेल इटावा से केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ लाया गया था जांच में पता चला है कि सिपाहियों ने कैदी को हथकड़ी नहीं लगाई थी रात को कैदी के बगल वाले बेड में लेटे सिपाही भी सो गए आशंका है कि एक साजिश के तहत वीरेंद्र भागा और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
पुलिस ने इटावा में वीरेंद्र के घर ताला लगा मिला
डकैत वीरेंद्र लोधी की तलाश में इकदिल क्षेत्र में उसके गांव जगन्नाथपुर में पुलिस ने छापा मारा, मगर वहां ताला पड़ा मिला। एसएसपी जय प्रकाश ङ्क्षसह ने बताया, गांव बालमपुरा से उसके भांजे जगदीश को हिरासत लेकर संभावित ठिकानों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
जेल से भी तीन टीमें रवाना ढूंढने के लिए
फरार डकैत की तलाश के लिए फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से तीन अलग-अलग टीमें रवाना की गई हैं कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक प्रमोद कुमार शुक्ला ने बताया, कैदी के फरार होने के मामले में लापरवाही के बिंदु पर जांच की जाएगी।



