Thursday, January 15, 2026
spot_img
HomeLucknow Newsयूपी में पहली बार ऐसे हुई किसी डीजीपी की विदाई

यूपी में पहली बार ऐसे हुई किसी डीजीपी की विदाई

लखनऊ। डीजीपी पर अकर्मण्यता का आरोप लगाते हुए सीधे डीजी नागरिक सुरक्षा के पद पर भेजा गया है। इससे पहले कई डीजीपी हटाए गए लेकिन उन्हें अकर्मण्यता के आरोप के चलते सीधे नागरिक सुरक्षा के पद पर नहीं भेजा गया। सपा सरकार में वर्ष 2013 में मुकुल गोयल को एडीजी कानून-व्यवस्था बनाया गया था। चुनाव के दौरान पुलिस के मुखिया की जो नेतृत्व क्षमता दिखनी चाहिए थी, वह न दिखने के कारण शासन नाराज चल रहा था बता दें कि कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकुल गोयल को हटाकर डीजी नागरिक सुरक्षा के पद पर भेज दिया। उन्हें शासकीय कार्यों की अवहेलना करने, विभागीय कार्यों में रुचि न लेने और अकर्मण्यता के चलते हटाया गया है। डीजीपी का कार्यभार नए डीजीपी की तैनाती तक एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार को सौंप दिया गया है। डीजी नागरिक सुरक्षा पद पर कार्यरत बिश्वजीत महापात्रा को डीजी कोऑपरेटिव सेल के पद पर भेजा गया है।

सपा राज में विवादों में आए थे मुकुल गोयल

वर्ष 2006 में सपा शासन काल में हुए सिपाही भर्ती घोटाले में भी विवादों में रहे थे। उन पर आरोप थे कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और शासन में बैठे अधिकारियों के इशारे पर भर्तियां की थीं। मायावती ने सरकार बनाने के बाद मामले की जांच सौंपी थी। बसपा शासनकाल में 23 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया था। कार्रवाई होने से पहले ही मुकुल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। सहारनपुर एसएसपी रहते हुए एक नेता की हत्या के बाद हुए बवाल में मुकुल गोयल को निलंबित कर दिया गया था। ललितपुर थाने में रेप की घटना, महिला को निर्वस्त्रत्त् करके पीटने का मामला सामने आने पर सीएम उनसे नाराज थे

शासन से अच्‍छे नहीं रह गए थे रिश्‍ते

विभाग में हमेशा ऐसी अकटलें लगाई जाती रहीं कि डीजीपी मुकुल गोयल के शासन के साथ रिश्ते अच्छे नहीं हैं। इन अटकलों को उस समय बल मिला जब पिछले दिनों उन्होंने लखनऊ हजरतगंज कोतवाली का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभारी इंस्पेक्टर के कार्यों पर नाराजगी जताते हुए उन्हें हटाने का निर्देश दिया लेकिन अंतत: इंस्पेक्टर को नहीं हटाया गया। इस घटना के कुछ ही दिनों बाद मुख्यमंत्री ने सभी जोन, रेंज और जिलों के पुलिस अधिकारियों को अपने विवेक से काम करने और साफ-सुथरी छवि के पुलिस कर्मियों को ही फील्ड में महत्वपूर्ण तैनाती देने का निर्देश दिया था। तब यह माना गया था कि यह निर्देश डीजीपी को ही ‘संदेश’ देने के उद्देश्य से दिया गया। इसी तरह कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान डीजीपी की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी थी। इसमें अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी और एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार मौजूद थे, जबकि डीजीपी लखनऊ में मौजूद होने के बावजूद इसमें शामिल नहीं हुए थे। आईपीएस अफसरों के तबादलों में हो रही देरी को भी डीजीपी से शासन की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा था। विधानसभा चुनाव के बाद से ही पुलिस कमिश्नरेट समेत जोन, रेंज व जिलों में तैनात कई अफसरों का तबादला संभावित है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular