Saturday, July 25, 2026
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यूपी में राम मंदिर बनाने के बावजूद अयोध्या में क्यों मात खा गई बीजेपी पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कर दिया साफ

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की अगुवाई में इंडिया गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। कमाल का प्रदर्शन करते हुए इंडिया गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीत ली है। समाजवादी पार्टी ने अकेले 37 सीटों पर जीत दर्ज की। इन 37 सीटों में भगवा दुर्ग अयोध्या से सपा की जीत ने सभी को हैरान कर दिया है। अयोध्या से समाजवादी पार्टी की जीत को लेकर अखिलेश यादव ने कहा- ‘सच्चाई तो ये है भाजपा और भी सीटें हारती उत्तर प्रदेश में। अयोध्या की जनता मैं धन्यवाद देता हूं, अयोध्या की जनता का दुख दर्द आपने देखा होगा। उन्हें उनकी ज़मीन का पर्याप्त मुआवज़ा नहीं दिया गया, उनके साथ अन्याय किया गया, उनकी जमीन बाज़ार मूल्य के बराबर नहीं ली गई, आपने उन पर झूठे मुकदमे लगाकर उनकी ज़मीन जबरन छीन ली। आप किसी पुण्य काम के लिए आप गरीबों को उजाड़ रहे हैं इसीलिए, मुझे लगता है कि अयोध्या और आसपास के इलाकों के लोगों ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया।”

यूपी में बीजेपी की बड़ी हार: अखिलेश

“उत्तर प्रदेश की जनता ने मुद्दों पर वोट दिया और जनता के मुद्दों पर चुनाव हुआ। बीजेपी की बड़ी हार यूपी में हुई है। जहां सवाल सरकार बनने का और न बनने का है तो सरकारें बना करती हैं और सरकारें गिरा करती हैं सरकार में बहुमत न हो तो बहुत लोग को खुश करके बनाई जाती है तो कोई और खुश कर देगा तो उधर चले जाते हैं। हमें उम्मीद है जनता ने जो फैसला देश के सामने लिया है संविधान और आरक्षण मजबूत हो।”समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश की 80 संसदीय सीटों के चुनाव में भाजपा को स्तब्ध कर दिया है। गठबंधन ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए 80 में से 43 सीटें जीत ली हैं जबकि भाजपा को 33 सीटें ही मिल सकी हैं।

वर्ष 2014 की तरह बसपा का इस बार भी खाता नहीं खुला है

भाजपा की सहयोगी रालोद ने दो व अपना दल ने एक सीट जीती है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को भी एक सीट मिली है। वर्ष 2014 की तरह बसपा का इस बार भी खाता नहीं खुला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी से लगातार तीसरी बार जीत गए हैं, जबकि राहुल गांधी ने रायबरेली और अखिलेश यादव ने कन्नौज से जीत हासिल की है।
केंद्र सरकार के सात मंत्री भी चुनाव हार गए हैं, जिनमें स्मृति इरानी भी शामिल हैं। भाजपा ने अपने 47 सांसदों को फिर से टिकट दिया था, इनमें से 26 चुनाव हार गए हैं।
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