Monday, July 27, 2026
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दागी दरोगा को मिलता है चौकी और थाना,ईमानदार पुलिसकर्मी को भरना पड़ता है हरजाना

कानपुर कई बार लोगों को न्याय दिलाने वाली पुलिस विभाग खुद के कर्मचारियों को ही न्याय देने में भूल कर बैठता है ऐसे अनेकों मामले देखने को मिले हैं जिनमें गलती उच्च अधिकारी की होती है पर उसका खामियाजा निचले स्तर के कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है हम बात करने जा रहे है ऐसे ही एक उप निरीक्षक की जिनको अपने ही विभाग का शिकार बनना पड़ा उपनिरीक्षक को बेगुनाह होने के बाद भी एक बार जेल भेज दिया गया । तो दूसरी बार बेटे की पढ़ाई के लिए बाइक खरीदने के चक्कर में जिले के बाहर भेज दिया गया बताते चलें जेल से छूटने के बाद काफी प्रयासों के बाद मिली देश सेवा की नौकरी को दरोगा अजय मिश्रा द्वारा पूर्ण निष्ठा से किया जा रहा था जिसके कारण उनको कई प्रशस्ति पत्र भी दिए गए पर उनके द्वारा किए जा रहे सराहानी कार्य तो लोगो को नहीं दिखे पर उनका अपने बेटे की पढ़ाई के लिए एक बुलट यानी मोटरसाइकिल खरीदना लोगो की आंखो में चुभने लगा और उपनिरीक्षक अजय मिश्रा की शिकायत उच्च अधिकारियों से कर दी गई।

अजय मिश्रा जैसे ईमानदार दरोगा पर कार्यवाही की जा रही है

हैरत की बात तो यह है अपराधियों के द्वारा किए जा रहे अपराध की शिकायत आने पर आलाधिकारियों द्वारा मामले की जांच कर कार्यवाही करने की बात कही जाती पर अपने ही विभाग ईमानदार पुलिसकर्मी पर बिना जांच के कार्यवाही कर दी जाती है जहां अपराधी आज भी खुले घूम रहे हैं तो वही अजय मिश्रा जैसे ईमानदार दरोगा पर कार्यवाही की जा रही है वैसे तो आरटीओ ऑफिस में प्रतिदिन हजारों गाड़ी खरीदी वह बेची जाती है उनमें से कई बड़े बड़े अपराधियों व राजनेताओं की भी होती हैं पर आरटीओ ऑफिस में गाड़ी खरीदने के समय वाहन स्वामी का नाम और उस गाड़ी पर कोई लोन है या नहीं यह सब चीजों की जानकारी प्राप्त की जाती है आरटीओ विभाग के किसी भी कर्मचारी को यह नहीं पता होता कि कौन सी गाड़ी का मालिक अपराधी है य सफेदपोश लोग हैं जिस तरह एक साधारण व्यक्ति की गाड़ी ट्रांसफर करने में प्रोसेस लगता है वही प्रोसेस के तहत दरोगा अजय मिश्रा द्वारा भी बुलेट खरीदी गई थी जिसकी जानकारी अधिकारियों को होते ही अधिकारियों ने बिना जांच किए अजय मिश्रा जैसे कर्तव्यनिष्ठा वाले अपने ही  कर्मचारी पर कार्यवाही कर दी । हैरत की बात तो यह है कि ऐसे ही ना जाने कितने पुलिसकर्मी अपने ही विभाग का शिकार बनते देखे जाते हैं जिनकी सुनने वाला कोई भी अधिकारी व कर्मचारी नहीं होता ।
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